कुत्ते के काटने की अनजान चोट ने छीन ली 9 साल के बच्चे की जान—रेबीज़ से मौत के बाद सुरजावली गांव में पसरा सन्नाटा
कुत्ते के काटने से 9 साल के मासूम की रेबीज़ से दर्दनाक मौत, पूरे गांव में पसरा मातम

कुत्ते के काटने की अनजान चोट ने छीन ली 9 साल के बच्चे की जान—रेबीज़ से मौत के बाद सुरजावली गांव में पसरा सन्नाटा
बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। अरनिया क्षेत्र के सुरजावली गांव के 9 वर्षीय बच्चे सत्यदेव की रेबीज के कारण मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, परिवार को कुत्ते के काटने का संदेह ही नहीं था, जिसके चलते समय पर टीकाकरण नहीं हो पाया।
बुखार से शुरू हुए लक्षण :- तीन दिन पहले सत्यदेव को बुखार आया था। परिजनों ने गांव के डॉक्टर से दवा ली, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे में रेबीज जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। कुत्ते के संभावित काटने पर परिवार का ध्यान न जाना और शुरुआती लापरवाही बच्चे की जान पर भारी पड़ गई।
इलाज के लिए अलीगढ़ से दिल्ली तक दौड़े परिजन:-स्थिति बिगड़ने पर बच्चे को अलीगढ़ ले जाया गया, जहां से उसे दिल्ली के अर्बन हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने देखते ही बच्चे में रेबीज के लक्षण की पुष्टि कर दी और बताया कि यह बीमारी लक्षण उभरने के बाद लाइलाज हो जाती है।
भयंकर लक्षण और दर्दनाक अंत:-सत्यदेव में पानी से डरने (हाइड्रोफोबिया) और कुत्ते जैसी हरकतें करने जैसे रेबीज के क्लासिक लक्षण दिखाई दे रहे थे। परिजन उसे भरतपुर अस्पताल भी लेकर गए, लेकिन देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बच्चे के पिता विष्णु ने बताया कि सत्यदेव उनका इकलौता बेटा था। अब परिवार में दो बेटियां ही हैं। पूरे गांव में सदमे और शोक का माहौल है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया:- बुलंदशहर के सीएमओ ने कहा कि जिला अस्पताल और सीएचसी में रेबीज रोधी टीके पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, और आने वाले हर मरीज को समय से टीका लगाया जाता है। यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि कुत्ते के काटने के बाद तुरंत टीकाकरण कितना जरूरी है, भले ही घाव छोटा या नजर न आ रहा हो।


