कानपुर के साकेत नगर स्थित शिवम एनक्लेव अपार्टमेंट में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां एक तालाबंद फ्लैट में मंदिर के दीपक से लगी आग ने पूरी गृहस्थी को चंद मिनटों में खाक कर दिया। यह फ्लैट स्माल आर्म्स फैक्ट्री के रिटायर्ड कर्मचारी अरविंद त्रिपाठी का था, जो अपनी पत्नी रंजना के साथ तीसरी मंजिल पर फ्लैट नंबर 303 में रहते हैं। आग की चपेट में आने से लाखों रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई, हालांकि फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई ने अन्य फ्लैट्स को तबाही से बचा लिया।
कैसे भड़की आग? अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे उन्होंने फ्लैट में बने भगवान के मंदिर में पूजा की और दीपक जलाकर पत्नी के साथ यशोदा नगर में अपने माता-पिता के घर के लिए निकल गए। फ्लैट को ताला लगाकर वे संजय वन के पास पहुंचे ही थे कि अपार्टमेंट के अन्य निवासियों के फोन आने शुरू हो गए, जिनमें बताया गया कि उनके फ्लैट में भीषण आग लग गई है। जब तक वे वापस लौटे, उनका फ्लैट धू-धू कर जल रहा था।
फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई सूचना मिलते ही फजलगंज फायर स्टेशन से दो दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का कार्य शुरू किया। किदवईनगर इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार राम ने बताया कि मंदिर में जल रहे दीपक से आग की शुरुआत हुई, जो देखते ही देखते पूरे फ्लैट में फैल गई। लगभग दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया। उनकी तत्परता से अपार्टमेंट के अन्य फ्लैट्स को आग की चपेट में आने से बचाया गया।
आग का भयावह मंजर आग इतनी भीषण थी कि इसने न केवल अरविंद के फ्लैट को पूरी तरह नष्ट कर दिया, बल्कि इसकी लपटें बालकनी के रास्ते ऊपर की मंजिल पर नारायण अग्रवाल के फ्लैट तक पहुंच गईं। सामने के फ्लैट में रहने वाले डॉ. नरेती सिंह के फ्लैट का दरवाजा भी जलकर खाक हो गया, और दीवारें काली पड़ गईं। अपार्टमेंट के निवासियों ने फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग की भयावहता के आगे उनकी कोशिशें नाकाम रहीं। फायर ब्रिगेड ने पानी की तेज बौछारों से आग को फैलने से रोका, जिससे सोसायटी के लोगों ने राहत की सांस ली।
कोई जनहानि नहीं, लेकिन भारी नुकसान इस घटना में किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन अरविंद त्रिपाठी की लाखों रुपये की गृहस्थी जलकर राख हो गई। स्थानीय लोगों ने फायर ब्रिगेड की सूझबूझ और बहादुरी की जमकर तारीफ की, जिनके समय पर हस्तक्षेप ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया।