Santosh Kumar Yadav / Sat, Nov 1, 2025 / Post views : 88
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने नागरथार समुदाय की समर्पित समाज सेवा और वे जहाँ भी जाते हैं, वहाँ तमिल संस्कृति को बढ़ावा देने के उनके लगातार प्रयासों की तारीफ़ की। पराष्ट्रपति ने कहा कि काशी को दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है और उन्होंने कहा कि नया बना सतरम आने वाले भक्तों को बहुत फायदा पहुंचाएगा और साथ ही आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने में भी मदद करेगा।
सी. पी. राधाकृष्णन ने देवी अन्नपूर्णी अम्मन देवी की मूर्ति को काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में वापस लाने की भी सराहना की। यह मूर्ति, जो एक सदी पहले वाराणसी के मंदिर से चोरी हो गई थी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार के लगातार प्रयासों से 2021 में कनाडा से भारत वापस लाई गई थी।
इससे पूर्व इस अवसर पर उपराष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उप राष्ट्रपति बनने के बाद सर्वप्रथम काशी आगमन पर उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने "वाणक्कम काशी" को उद्घोषित करते हुए उपराष्ट्रपति बनने के बाद बाबा विश्वनाथ की पावन धरा पर प्रथम आगमन पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वाराणसी की गंगा नदी से तमिलनाडु की कावेरी नदी तक जुड़ी हुई सांची सभ्यता हमें यह याद दिलाती है कि हमारी भाषा भले अलग हो लेकिन हम सब एक हैं। मुख्यमंत्री योगी ने जोर देते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति उत्तर प्रदेश के प्रथम दौरे पर बाबा विश्वनाथ की धरा पर पधारे हैं जो भारत के प्रधानमंत्री की लोकसभा भी है।
उन्होंने कहा भगवान राम द्वारा रामेश्वरम में स्थापित शिवलिंग तथा काशी में स्थित बाबा विश्वनाथ दोनों भगवान शंकर के पूज्य स्थल हैं। भगवान श्रीराम तथा भगवान शिव के प्रयास से निर्मित रामसेतु की परंपरा को आदि शंकराचार्य ने आगे बढ़ाते हुए भारत के चारों कोने में मंदिर स्थापित कर ज्ञान परंपरा तथा सनातन धर्म को आगे बढ़ाया। यह हमारा सौभाग्य है कि आदिकाल से चली आ रही सनातन परम्परा को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे बढ़ा रहे हैं। पांड्या साम्राज्य द्वारा तमिलनाडु की काशी में यहां से एक शिवलिंग ले जाकर स्थापित किया गया, जिसको दक्षिण की काशी कहते हैं। भारत में संस्कृत भाषा तथा तमिल साहित्य सबसे प्राचीन साहित्य है, जो समाज में समरसता बनाए हुए है। अयोध्या धाम में संत रामानुजाचार्य की भी प्रतिमा स्थापित की गयी है। अयोध्या के पावन रामजन्म तीर्थस्थल के चारों रास्तों के नामकरण जगतगुरू शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, रामानंदाचार्य, भद्राचार्य के नामपर रखा गया है। काशी की आत्मा सनातन तथा आत्मीयता वैश्विक है। आज काशी नए कीर्तिमान को स्थापित कर रही है जिसमें काशी अपने नूतन रूप में वैश्विक स्तर पर छाई है। काशी में अब भक्ति के साथ विकास भी है। काशी में तुलसीदास ने रामायण लिखा, सारनाथ में भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिया तथा गुरुनानक, कबीरदास तथा संत रविदास भी काशी से सम्बन्धित रहे हैं। श्री काशी विश्वनाथ धाम में न केवल मंदिर का कायाकल्प हुआ बल्कि इसने भक्ति को नए वैश्विक स्तर पर जोड़ा गया है। आज का यह समारोह पवित्र कार्तिक मास में आयोजित होने वाला महत्वपूर्ण समारोह हो गया है। इस स्थान पर 200 वर्ष पूर्व नाटकोटाई समाज द्वारा बाबा विश्वनाथ के पूजनार्थ दी गयी थी लेकिन मुझे इसकी जानकारी होने पर मैने तुरंत लोकल प्रशासन को लगाकर इसको अतिक्रमण मुक्त कराया तथा इस धर्मशाला की नींव माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा किया गया था। तत्पश्चात् उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर शांति, समृद्धि और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित अन्नपूर्णी अम्मन देवी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। इस दौरान उप राष्ट्रपति श्री काशी विश्वनाथ धाम की भव्यता को देख अभिभूत दिखे।
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