Fri, 11 Sep 2026
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: आखिर क्या है रेलवे का इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम, जिससे हुआ बालासोर रेल हादसा, समझें

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ओडिशा के बालासोर में भीषण रेल हादसे की बड़ी बजह इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में गड़बड़ी बताई गई है रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने मामले की जांच की है यह हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव की वजह से हुआ है उन्होंने कहा है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी बालासोर रेल हादसे के बाद ट्रैक को साफ करने और फिर से बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है बुधवार सुबह से ट्रैक पर यातायात की बहाली शुरू हो जाएगी। रेलवे इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जो रेलवे सिग्नलिंग को कंट्रोल करने के लिए उपयोग की जाती है यह एक सुरक्षा प्रणाली है जो ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिग्नल और स्विच के बीच ऑपरेटिंग सिस्टम को कंट्रोल करती है यह सिस्टम रेलवे लाइनों पर सुरक्षित और अवरुद्ध चल रही ट्रेनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करती है. इसकी मदद से रेल यार्ड के कामों को इस तरह से कंट्रोल किया जाता है जो नियंत्रित क्षेत्र के माध्यम से ट्रेन का सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करें। रेलवे सिग्नलिंग अन- इंटरलॉक्ड सिग्ललिंग सिस्टम, ‘मैकेनिकल और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल इंटरलॉकिंग से लेकर अब तक के मॉर्डन हाई टेक सिग्नलिंग तक एक लंबा सफर तय कर चुका है. इलेक्ट्रॉनिक और इंटरलॉकिंग(EI) एक ऐसी सिग्नलिंग व्यवस्था है जिसके इलेक्ट्रो- मैकेनिकल या पहले से उपयोग हो रहे पैनल इंटरलॉकिंग के कई फायदे है। इससे पहले रेलवे सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग में मैकेनिकल तत्वों का उपयोग किया जाता था जैसे कि रेलवे स्विच, लॉक और सिग्नल मेकेनिज्म इसके बदले में, रेलवे इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर आधारित सिस्टम का उपयोग करती है जिसमें ऑरेशनल कमांड, स्विच और सिग्नल स्थितियों को ऑपरेट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक निर्देश दिए जाते है इस सिस्टम में लोगों की गलतियों की बहुत कम गुंजाइश होती है इसे ट्रेनों को संचालन को सुरक्षित ढंग से कंट्रोल करने के लिए बनाया गया है रेलवे इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के इस्तेमाल से रेलवे सुरक्षा में महत्वपूर्ण सुधार हुए है और ट्रेनों के संचालन में अधिक सुविधा हुई है। रेलवे का इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक प्रणाली है जो रेलवे पर ट्रेनों की सुरक्षा और एक सुगम गति प्रदान करने के लिए उपयोग होती है यह इंजीनियरिंग सिस्टम है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर नेटवर्क के उपयोग से ट्रेनों के बीच ट्रांजिशन को कंट्रोल किया जाता है। जब एक ट्रेन रेल नेटवर्क पर चलती है तो उसके पास एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम द्वारा प्रशिक्षित संकेतक होते है ये सेंसर ट्रेन की स्थिति, गति और अन्य जानकारी को मापते है और इस जानकारी को सिग्नलिंग सिस्टम को भेजते है सिग्नलिंग सिस्टम फिर उस ट्रेन के लिए उचित संकेत जारी करता है, जिससे ट्रेन की गति,रुकावट और दूसरे सेंसर को कंट्रोल किया जाता है यह प्रक्रिया लगातार होती रहती है, जिससे ट्रेनों को उचित संकेत प्राप्त रहते है जिससे सुरक्षा सुनिश्चित रहे इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली तकनीकों में माइक्रोप्रोसेसर, सेंसर, इंटरफेस मॉडयूल, नेटवर्क कनेक्टिविटी और सफलतापूर्वक टेस्ट किए गए एल्गोरिदम शामिल होते है।

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