Santosh Kumar Yadav / Fri, Aug 14, 2026 / Post views : 108
बरेली। रेलवे टिकटों की कथित कालाबाजारी के मामले में पितांबरपुर स्टेशन पर तैनात आरक्षण क्लर्क शैलेंद्र की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि क्लर्क तत्काल टिकट बुक कर अपने संपर्कों के माध्यम से उन्हें आगे उपलब्ध कराता था।
मामले में आरपीएफ की कार्रवाई के दौरान टिकटों के साथ एटीएम कार्ड और मोबाइल चैट मिलने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि बरामद चैट में मुंबई समेत अन्य शहरों से जुड़े संपर्कों के संकेत मिले हैं। ऐसे में पूरे नेटवर्क की गहन जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, 4 जुलाई को शैलेंद्र को हिरासत में लेकर करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई थी, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि कार्रवाई के दौरान टिकट, कई एटीएम कार्ड और कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़ी चैट सामने आई थीं, तो पूरे मामले की विस्तृत जांच क्यों नहीं की गई?
बताया जा रहा है कि शैलेंद्र के पास करीब 3 से 4 एटीएम कार्ड मिलने की बात भी सामने आई है। साथ ही मुंबई से जुड़े कथित संपर्कों और चैटिंग के साक्ष्य होने का दावा किया जा रहा है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और बरामद सामग्री की जांच रिपोर्ट सामने आना अभी बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोपों और कथित साक्ष्यों के बावजूद शैलेंद्र अभी भी मुरादाबाद डिविजन में तैनात कैसे है?रेलवे विभाग ने अब तक इस मामले में कोई बड़ी विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या तत्काल टिकटों की कथित कालाबाजारी केवल एक कर्मचारी तक सीमित थी या इसके पीछे रेलवे के बाहर भी कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। मुंबई और अन्य शहरों से जुड़े कथित संपर्कों की जांच हुई या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है।
अब निगाहें रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि बरामद टिकट, एटीएम कार्ड और मोबाइल चैट की जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो पूरे नेटवर्क का खुलासा करना जांच एजेंसियों के लिए अहम चुनौती होगी।
नोट: खबर में लगाए गए आरोप और बरामदगी से जुड़े दावे उपलब्ध जानकारी के आधार पर हैं। संबंधित रेलवे अधिकारी/कर्मचारी का पक्ष और आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
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