Santosh Kumar Yadav / Tue, Sep 29, 2026 / Post views : 184
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण से जुड़े चर्चित लीजबैक मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। 1997 बैच के वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई नोएडा प्राधिकरण में वर्ष 2011 के दौरान उनके कार्यकाल से जुड़े जमीन के लीजबैक मामले में विभागीय जांच और अनुशासनिक कार्रवाई के बाद की गई है।
हरीश चंद्र उस समय नोएडा विकास प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनात थे। मामला ग्राम शहदरा के अंतर्गत सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 से जुड़ी करीब 3,81,527 वर्गमीटर अर्जित भूमि के लीजबैक से संबंधित है।
विभागीय जांच में आरोप लगाया गया कि लीजबैक की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमों के तहत यह सुविधा पात्र स्थानीय किसानों के लिए निर्धारित थी और प्रति परिवार अधिकतम 450 वर्गमीटर तक भूमि लीजबैक किए जाने का प्रावधान था। आरोप है कि इसके बावजूद बाहरी लोगों और निजी कंपनियों के पक्ष में बड़े भूखंडों का लीजबैक किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में आवंटित जमीन की बाजार कीमत करीब 3,800 से 4,000 करोड़ रुपये के बीच आंकी गई थी। जांच के दौरान 15,000 वर्गमीटर से अधिक के भूखंड निजी कंपनियों के नाम किए जाने का भी मामला सामने आया।
इस प्रकरण में वर्ष 2013 से ही हरीश चंद्र के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। मामले की जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) रितु माहेश्वरी के स्तर से भी की गई थी।
विभागीय कार्रवाई पूरी होने और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की मंजूरी मिलने के बाद शासन ने हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। बर्खास्तगी का आदेश प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज की ओर से जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
हरीश चंद्र वर्तमान में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात बताए जाते हैं। इसी मामले से जुड़ी विभागीय कार्रवाई के चलते उनके IAS कैडर में पदोन्नति का मामला भी लंबे समय से लंबित था।
नोएडा में अधिग्रहित भूमि के लीजबैक की व्यवस्था मूल रूप से पात्र स्थानीय किसानों को उनकी भूमि के बदले निर्धारित सीमा में जमीन वापस देने के उद्देश्य से थी। आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल निर्धारित पात्रता से बाहर जाकर बड़े भूखंडों के आवंटन में किया गया। इसी को लेकर लंबे समय तक विभागीय जांच और अनुशासनिक कार्रवाई चली।
नोट: जमीन आवंटन और लीजबैक से जुड़े आरोपों को शासन की विभागीय जांच और उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। खबर में किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को स्वतंत्र रूप से अपराध सिद्ध होने के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
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