Santosh Kumar Yadav / Tue, Aug 18, 2026 / Post views : 57
वाराणसी। चंदौली से वाराणसी आ रहे एक अधिवक्ता को रास्ते में समोसा खाना उस वक्त भारी पड़ गया, जब दो गर्म समोसे मांगने को लेकर विवाद हो गया। मामला इतना बढ़ा कि अधिवक्ता को पुलिस से लेकर पुलिस कमिश्नर और आखिरकार कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। करीब छह महीने बाद कोर्ट के आदेश पर चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, पेशे से अधिवक्ता शिवशंकर सिंह चंदौली से वाराणसी आ रहे थे। रास्ते में भूख लगने पर वह एक मिठाई की दुकान पर पहुंचे और दो समोसे मांगे। आरोप है कि दुकान पर मौजूद व्यक्ति ने उन्हें दो ठंडे समोसे दे दिए। अधिवक्ता ने गर्म समोसे देने की मांग की, जिसके बाद दुकानदार कथित तौर पर भड़क गया।
आरोप है कि दुकानदार ने अधिवक्ता से कहा, "कहीं के कलेक्टर हो क्या कि तुमको गर्म समोसा देंगे?" इसके बाद विवाद बढ़ गया और मारपीट समेत अन्य आरोप लगाए गए।
अधिवक्ता का आरोप है कि उन्होंने मामले की शिकायत चौबेपुर थाने में करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की मांग की, लेकिन करीब तीन घंटे थाने में बैठाए रखने के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने वाराणसी के पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की। पुलिस कमिश्नर की ओर से रिपोर्ट तलब कर मुकदमा दर्ज कराने का भरोसा दिए जाने का भी अधिवक्ता ने दावा किया।
आरोप है कि इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद अधिवक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एसीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद 14 अगस्त को चौबेपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस के मुताबिक दर्ज मुकदमे में बीएनएस की धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3) और 309(4) के तहत मिठाई की दुकान के मालिक गुप्तेश्वर सिंह, उनके बेटे सोमेश्वर सिंह समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है।
फिलहाल, दो गर्म समोसों से शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल चुका है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही विवाद की पूरी सच्चाई सामने आएगी।
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