राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भोपाल के रविंद्र भवन में उत्कर्ष और उन्मेष उत्सव में शामिल हुईं। शुभारंभ कर उन्होंने कहा, राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद अब तक मेरी सबसे अधिक यात्राएं मध्यप्रदेश में हुई हैं। यह मेरी MP में 5वीं यात्रा है। उत्कर्ष उत्सव 3 से 5 अगस्त तक चलेगा। उन्मेष उत्सव 3 से 6 अगस्त तक चलेगा। एंट्री गेट से सभागार तक राष्ट्रपति के स्वागत के रूप में नृत्य की प्रस्तुति दी गई। राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित रहे।
सभी भाषाएं मेरी अपनी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भोपाल में कहा- आज 140 करोड़ देशवासियों का मेरा परिवार है। सभी भाषाएं और बोलियां मेरी अपनी हैं। हमारी परंपरा में यत्र विश्वम् भत्येकनीडम् जहां सारा विश्व चिड़ियों का एक घोंसला बनके रहे की भावना प्राचीनकाल से है। राष्ट्रप्रेम और विश्व बंधुत्व के आदर्श का संगम हमारे देश में दिखाई देता रहता है।संस्कृति मंत्रालय के संगीत नाटक एवं साहित्य अकादमी, संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश के सहयोग से यह आयोजन हो रहा है। पिछली बार शिमला में यह आयोजन हुआ था। मध्यप्रदेश में पहली बार हो रहा है।
साहित्य लोगों को जोड़ता है
प्रेसिडेंट ने कहा- साहित्य और कला ने मानवता को बचाए रखा है। साहित्य जुड़ता भी है और लोगों को जोड़ता भी है। हमारा सामूहिक प्रयास अपनी संस्कृति, लोकाचार, रीति-रिवाज और प्राकृतिक परिवेश को सुरक्षित रखने का होना चाहिए। हमारे जनजाती समुदाय के भाई-बहन और युवा आधुनिक विकास में भागीदार बनें।प्रेसिडेंट ने कहा, भारत में 700 कम्युनिटी के आदिवासी, लेकिन उनकी भाषाएं इससे ज्यादा हैं। भाषाओं को बचाकर रखना लेखकों का कर्तव्य है। यह हम सभी का भी दायित्व है।
समन्वय से रचना का सृजन
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कहा, दिल, दिमाग और आत्मशक्ति के समन्वय से रचना का सृजन होता है। इसके लिए किसी साधन संसाधन की आवश्यकता नहीं होती है। इस आयोजन के लिए सरकार को बधाई।
साहित्य से मन, बुद्धि और आत्मा का सुख: CM
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- मन, बुद्धि और आत्मा का सुख अगर कोई देता है तो साहित्य, संगीत और कला देती है। मध्यप्रदेश प्राचीनकाल से कला और संस्कृति की संगम स्थली रही है। यह साहित्यकारों की कर्मभूमि और कलाकारों की प्रिय भूमि है। खजुराहो, भीम बैठका आदि इसके प्रमाण हैं।मेरा-तेरा की सोच छोटे मन वालों की होती है। हमारी धरती वो धरती है, जहां बच्चा-बच्चा वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष करता है। दुनिया के विकसित देश में जब सभ्यता के सूर्य का उदय भी नहीं हुआ था, तब हमारे यहां वेद रच दिए गए थे।
मणिपुर के हालातों पर प्रतिक्रिया दें
राष्ट्रपति के भोपाल दौरे पर कांग्रेस के विभागों और प्रकोष्ठ की प्रभारी शोभा ओझा ने ट्वीट कर कहा, आपका मध्यप्रदेश में स्वागत है। लेकिन, बेहतर होता कि आप पहले मणिपुर के हालातों पर अपनी प्रतिक्रिया देतीं, चिंता जाहिर करतीं। प्रधानमंत्री पर यह दबाव डालतीं कि वे तत्काल संसद को संबोधित करें।आप आदिवासी समाज की आदर्श हैं। रोल मॉडल हैं। आपको उत्कर्ष और उन्मेष जैसे उत्सवों में शामिल होने से ऐसे समय बचना चाहिए, जब देश में आदिवासियों के अपकर्ष और दमन का दुखद और हिंसक दौर अपना विकराल रूप ले चुका है।