अयोध्या (पूराकलन्दर) मीनार गिराने के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन, छतिरवा गांव का मुख्य मार्ग फिर बर्बाद
अवैध खनन पर कार्रवाई के दावों के बीच खनन माफियाओं के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे। मीनार गिराने और पुलिस कार्रवाई के बाद भी छतिरवा गांव का मुख्य मार्ग दोबारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

अयोध्या (पूराकलन्दर) — मीनार गिराने के बाद भी नहीं रुका अवैध खनन, छतिरवा गांव का मुख्य मार्ग फिर बर्बाद
अवैध खनन पर कार्रवाई के दावों के बीच खनन माफियाओं के हौसले कम होने का नाम नहीं ले रहे। मीनार गिराने और पुलिस कार्रवाई के बाद भी छतिरवा गांव का मुख्य मार्ग दोबारा क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को बड़ी मेहनत से पाइप डालकर रास्ता ठीक कराया गया था, लेकिन देर रात मिट्टी से लदे डंपरों को खनन माफियाओं ने इसी मार्ग पर उतारकर फँसा दिया। डंपर निकालने की जल्दबाज़ी में पूरे रास्ते की दुर्दशा कर दी गई।
पुलिस सायरन सुनते ही माफिया डंपर खाली कर वाहन लेकर फरार हो गए। रास्ता टूटने के बाद गन्ने से भरी किसान की ट्राली पलट गई, जिससे बड़ा हादसा होते–होते टल गया। पहले से दर्ज शिकायतें, फिर भी ढील?
जानकारी के अनुसार, मंगरु यादव और मौलाना अहमद के खिलाफ पहले से ही थाने में शिकायत दर्ज है।
पुलिस को खनन माफिया की ओर से कहानी सुनाई गई कि —”सीआरपीएफ कैंप के लिए मिट्टी ले जाई जा रही थी, रास्ता भटक गया था।”
लेकिन ग्रामीणों का सवाल है—
- मिर्जापुर-निमौली तालाब में गिरी मिट्टी किस कैंप का हिस्सा है?
- भरतकुंड में फेंकी गई मिट्टी किस सरकारी कार्य में उपयोग होनी थी?
- आखिर सीआरपीएफ कैंप के नाम पर कितने दिन तक अवैध खनन छुपाया जाएगा? खनन विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों पर होती है, जबकि चिन्हित खनन माफियाओं पर विभाग मौन हो जाता है।
प्रश्न उठ रहा है—
- सरकारी योजनाओं के नाम पर निजी मिट्टी की बिक्री कैसे हो रही है?
- क्या जनता सिर्फ दोहन के लिए छोड़ दी गई है, जहां सरकारी योजना के नाम पर मौत के कुएँ खोदे जा रहे हैं?
पुराना मामला आज तक अधर में
पूर्व उपजिलाधिकारी अभिषेक सिंह के कार्यकाल में रिंग रोड के नाम पर महावां-मऊ-शिवावा सहित कई स्थानों पर 20 फीट से अधिक गहरे “मौत के गड्ढे” खोदे गए थे। इनकी जांच भी अब तक पूरी नहीं हुई है।
ग्रामीणों की मांग
- ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- अवैध खनन रोकने के लिए तत्काल सख़्त कार्रवाई हो
- घटना में शामिल डंपरों को जब्त किया जाए
- चिन्हित खनन माफियाओं पर कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो


