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: पूर्व सपा विधायक का भाई रिजवान सोलंकी 33 महीने बाद जेल से रिहा

Santosh Kumar Yadav / Tue, Sep 30, 2025 / Post views : 9

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  •  नजीर फातिमा की शिकायत से शुरू हुआ था विवाद ।
  • रिजवान बोले- पिता की कब्र पर पहले फ़ातिहा पढूंगा फिर मां का आशीर्वाद लूँगा ..
कानपुर : समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के भाई और जाजमऊ आगजनी मामले के सह-आरोपी रिजवान सोलंकी को आज लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कानपुर जेल से रिहा कर दिया गया। नवंबर 2022 में जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में नजीर फातिमा की झोपड़ी में आगजनी के मामले में रिजवान को जून 2024 में सात साल की सजा सुनाई गई थी। दिसंबर 2022 में गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तारी के बाद उन्होंने लगभग 2 साल 9 महीने जेल में काटे। इलाहाबाद हाईकोर्ट से गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई संभव हुई। जेल से बाहर कदम रखते ही रिजवान की आंखों में परिवार से मिलन की चमक थी। साथ ही ख़ुशी के आँसू भी थे इस दौरान जेल से बाहर आते ही उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं अपने मरहूम पिता व पूर्व विधायक हाजी मुश्ताक सोलंकी की कब्र पर फातिहा पढ़ूंगा। फिर नमाज अदा करूंगा और घर जाकर अपनी अम्मी का हाथ सिर पर रखवाकर उनका आशीर्वाद ( दुवाएँ ) लूंगा। उन्होंने भावुकता भरे लहजे में कहा कि अम्मी से जेल में जाली के पार से ही मुलाकात होती थी, वह अधूरी तमन्ना आज पूरी होगी।" जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में 7 नवंबर 2022 को हुई आगजनी की घटना ने कानपुर की सियासत में भूचाल ला दिया था। इस दौरान पीड़िता नजीर फातिमा ने शिकायत दर्ज की थी कि इरफान सोलंकी, रिजवान सोलंकी और उनके साथियों ने उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने के इरादे से उनकी झोपड़ी में आग लगा दी। इस घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया और सांप्रदायिक माहौल भी बिगड़ने लगा। ऐसे में पुलिस ने सोलंकी बंधुओं पर गंभीर धराओं में कार्यवाही करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे का रास्ता दिखा दिया । किन किन धाराओं में दर्ज हुआ था सोलंकी बंधुओं पर मुकदमा मुख्य धाराएं: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 436 (आगजनी), 147 (दंगा), 323 (मारपीट), 427 (संपत्ति को नुकसान), 504 (उकसाना) और 506 (धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया। सजा का फैसला: जून 2024 में कानपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने इरफान, रिजवान समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कारावास और 30,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद इरफान सोलंकी की सीसामऊ विधानसभा सीट से विधायकी रद्द हो गई, जो सपा के लिए बड़ा झटका था। हालांकि इस विधानसभा उपचुनावों में पुनः ये सीट इरफ़ान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी को मिली, उन्होंने बड़े अंतर से चुनाव जीतकर ये दिखा दिया कि ये विधानसभा सीट सोलंकी परिवार की पुश्तैनी सीट है । रिहाई का आधार: आगजनी मामले में रिजवान को पहले ही जमानत मिल चुकी थी, लेकिन वे गैंगस्टर एक्ट के तहत एक अन्य मामले में जेल में थे, ऐसे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2025 को इस मामले में रिजवान सोलंकी, इरफान सोलंकी और सहयोगी इसराइल अटेवाला को जमानत दे दी। अदालत ने रिजवान की 33 महीनों की हिरासत को पर्याप्त मानते हुए रिहाई का आदेश दिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सोलंकी परिवार का दावा रहा है कि नजीर फातिमा की शिकायत और आगजनी का मामला सियासी साजिश का हिस्सा था, जबकि वहीं दूसरी तरफ़ अभियोजन पक्ष ने इसे पुख्ता सबूतों पर आधारित बताया। इस घटना ने सपा की छवि को नुकसान पहुंचाया और कानपुर में तनाव का माहौल बनाया। इरफान सोलंकी की रिहाई: तकनीकी पेंच और ED का नया खतरा रिजवान की रिहाई ने सोलंकी परिवार में खुशी की लहर दौड़ा दी, लेकिन सभी की नजरें अब महराजगंज जेल में बंद इरफान सोलंकी पर टिकी हैं। बताते चले अबतक इरफान की 30 करोड़ की संपत्ति जब्त हो चुकी है । गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद इरफान और उनके गैंग की करीब 30 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है । साथ ही इरफान के 5 ठिकानों पर ED ने छापेमारी की थी। जिसमें संपत्तियों की लंबी फेहरिस्त मिली है। वहीं, जब इरफान कानपुर जेल में बंद थे, तब अखिलेश यादव उनसे मिलने गए थे। इसके बाद उन्हें महराजगंज जेल शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन रिज़वान इसी कानपुर जेल में बन्द था । इरफ़ान की भी जमानत याचिका हाईकोर्ट से मंजूर हो चुकी है, लेकिन रिलीज प्रक्रिया में देरी हो रही है। इसकी वजह भी कुछ टेक्निकल रही, जो इस प्रकार है । परवाना की गड़बड़ी: रिहाई का परवाना (रिलीज ऑर्डर) बनने के बाद आज गलती से कानपुर जेल भेज दिया गया, जिसकी वजह से आज इरफ़ान सोलंकी की रिहाई टल गई । इरफ़ान का परवाना कानपुर जेल पहुँचा था जिसे अब महराजगंज जेल ट्रांसफर किया जा रहा है। जेल प्रशासन को 48 घंटों में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश है, जिसके बाद इरफान की रिहाई संभव है। लेकिन इस रिहाई से पहले एक और पेंच इरफान की मुश्किलों पर खारे नमक जैसा घाव कर सकता है । जिसमे रिहाई से पहले ही इरफान के लिए एक बार फिर ED मुसीबत बन रही है । ED का शिकंजा: इरफान की राह में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का नया संकट मंडरा रहा है। मार्च 2024 में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में इरफान, रिजवान और अन्य के परिसरों पर छापेमारी की, जिसमें 26 लाख रुपये नकद और दस्तावेज जब्त हुए। आरोप है कि इरफान ने बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों को भारत में बसाने में मदद की, आधार कार्ड बनवाए और अवैध संपत्ति का निर्माण किया। ईडी की इस जांच से इरफान की रिहाई लंबी खिंच सकती है, क्योंकि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत नई कार्रवाई की आशंका है। इरफान सोलंकी: राजनीति और विरासत की कहानी इरफान सोलंकी का जन्म 5 जून, 1979 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था। उनके पिता, हाजी मुश्ताक सोलंकी, समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव के खास सहयोगी रहे। इरफान को राजनीति का जुनून और जज़्बा अपने पिता से ही मिला। इरफान ने अपने पिता की विरासत को संभालते हुए 2007 में उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की आर्य नगर सीट से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। समाजवादी पार्टी के बैनर तले उन्होंने शानदार जीत हासिल की। इसके बाद 2012 और 2017 में, जब देश में मोदी लहर का जोर था, तब भी इरफान ने सीसामऊ सीट से सपा का परचम लहराया। 2022 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत का सिलसिला बरकरार रखा। साल 2003 में इरफान सोलंकी ने नसीम सोलंकी से शादी की। दंपति के एक बेटे और दो बेटियां हैं। इरफान न केवल एक राजनेता हैं, बल्कि एक सफल व्यवसायी भी हैं, जो चमड़ा उद्योग में सक्रिय हैं और उनका खुद का लेदर कारखाना है। सियासी हलचल: सपा में उत्साह, विपक्ष का तंज सपा कार्यकर्ताओं ने रिजवान की रिहाई को "न्याय की जीत" बताते हुए कानपुर में छोटे जश्न आयोजित किए। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, "सोलंकी बंधु सपा के मजबूत स्तंभ हैं। उनकी वापसी से पार्टी और मजबूत होगी।" दूसरी ओर, विपक्ष ने इसे "अपराधियों को संरक्षण" का आरोप लगाया। रिजवान ने रिहाई के तुरंत बाद सियासी बयानबाजी से परहेज किया और परिवार व आस्था को प्राथमिकता दी, सूत्रों की माने यो रिजवान के जेल से बाहर आने के बाद सोलंकी परिवार एक छोटा धार्मिक समारोह आयोजित करने की योजना बना रहा है ।

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