अयोध्या। गुरु पूर्णिमा पर प्रशासन द्वारा रामपथ पर की गईं व्यवस्थाएं धरी की धरी रह गईं पिछले 15 दिन से सब कुछ ठीक के दावे किए जा रहे थे नयाघाट से हनुमान गढ़ी तक जाने के लिए कोई रूट डायवर्जन नहीं दिखा रामपथ पर चल रहे कार्य और भारी कीचड़ श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत बने रहे कार्यदायी संस्था आरएंडसी के कर्मचारी दुष्वारियां बढ़ाने पर तुले हुए थे गड्ढों से निकलने वाले पानी को सड़क पर ही गिराया जा रहा था। तमाम मुश्किल हालातों के बीच श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने में पसीने छूट गए हालांकि किसी प्रकार की अनहोनी का कोई समाचार नहीं है।
आषाढ़ माह के अंतिम दिन गुरु पूर्णिमा के पावन मौके पर हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे थे सुबह सरयू नदी में स्नान के बाद मंदिरों तक जाने के लिए निर्माणाधीन रामपथ पर दुश्वारियों के बीच से होकर हनुमान गढ़ी, कनक भवन, राम जन्मभूमि, मणिराम दास छावनी, अशर्फी भवन, रामवल्लभा कुंज, राम हर्षण कुंज, विभूति भवन, रंग महल सहित अन्य मंदिरों तक पहुंचे सके। मंदिरों में दर्शन पूजन करने के बाद गुरु की आराधना और वंदना कर वस्त्र, फल, मिष्ठान व अन्न दान कर आरती भी उतारी। इस दौरान जगह-जगह पर भंडारे का भी आयोजन किया गया था।
मणिराम दास छावनी के महंत व राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के दर्शन प्राप्त करने के लिए सुबह से ही हजारों भक्तों की भीड़ दिखी उनके उत्तराधिकारी महंत कमल दास ने कहा कि गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है शिष्य अपने गुरु का आशीर्वाद ले रहे हैं रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के स्थान हरीगोपाल धाम पर भी भक्तों की भारी भीड़ रही जहां गुरु वंदन कर रामलला का प्रसाद प्राप्त किया। आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूजा भी कहा जाता है यह प्राचीन परंपरा है तीन कलश तिवारी मंदिर में भी श्रद्धालु अपने गुरु महापौर गिरीशपति त्रिपाठी का आशीर्वाद लेने पहुंचे गिरीशपति ने कहा कि लोगों को गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करना चाहिए।