Wed, 24 Jun 2026
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: बिजनौर में फर्जी जज और पेशकार बनकर बैंक से 35 लाख रुपये का लोन लेने पहुंचे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Santosh Kumar Yadav / Sun, Oct 19, 2025 / Post views : 38

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बिजनौर में फर्जी जज और पेशकार बनकर बैंक से 35 लाख रुपये का लोन लेने पहुंचे दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना शुक्रवार देर शाम की है जब एचएफडीसी बैंक के शाखा प्रबंधक अतुल द्विवेदी ने फर्जी जज आयशा परवीन और वकील अनस के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। मुजफ्फरनगर के दधेडू कलां निवासी आयशा परवीन ने खुद को रामपुर में तैनात न्यायाधीश बताया, जबकि बिजनौर के किशनवास निवासी अनस ने खुद को उनका पेशकार बताया था। वे बैंक से 35 लाख रुपये के पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने पहुंचे थे। लोन की रकम ट्रांसफर होने से ठीक पहले, बैंक को जमा किए गए दस्तावेजों पर संदेह हुआ। जांच के लिए साइबर थाना में तैनात पुलिसकर्मी विवेक तोमर को मौके पर बुलाया गया। प्रारंभिक जांच में आयशा परवीन का पहचान पत्र, सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और नियुक्ति पत्र सहित सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद पुलिस ने आयशा परवीन और वकील अनस के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद आयशा परवीन ने पुलिस से अपने परिवार को घटना की जानकारी न देने का अनुरोध किया था। हालांकि, पुलिस ने उनके परिजनों को सूचित कर दिया। शहर कोतवाली पहुंचे आयशा के पिता ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनकी बेटी असल में न्यायाधीश नहीं है। देहरादून में रहकर लॉ की पढ़ाई करने वाली आयशा ने 2019 में एमबीए भी किया। आयशा परवीन ने पीसीएस जे की परीक्षा भी दी। हालांकि उस परीक्षा में आयशा फेल हो गई थी लेकिन इसके बाद भी उसने दिसंबर 2023 में पास होने का शोर मचाया। परिवार वालों ने उस वक्त जश्न भी मनाया। बाकायदा आयशा की सफलता को अखबारों में भी प्रकाशित कराया गया था। गाड़ी पर लगा जज का स्टीकर, नहीं देती थी टोल जिस गाड़ी से आयशा परवीन बिजनौर पहुंची थी, उस पर आगे पीछे जज का स्टीकर लगा हुआ है। बड़े बड़े अक्षरों में न्यायाधीश भी लिखा है। दिहाड़ी पर गाड़ी चलाकर आए चालक ने पुलिस को बताया कि मैडम अक्सर उसे गाड़ी चलाने के लिए बुलाती थी। कहीं पर भी टोल नहीं दिया जाता था। गाड़ी को पुलिस ने बरामद किया है जोकि आयशा के भाई के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस की जांच में सामने आया कि आयशा परवीन ने रामपुर की पॉश कॉलोनी में दस हजार प्रति माह के किराए पर घर ले रखा था। घर में काम करने के लिए बाकायदा नौकरानी लगी थी। खुद को जज बताते हुए आयशा पूरा रौब गालिब करती थी। परिचितों को भी उसने खुद को जज ही बता रखा था ।

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