Wed, 19 Aug 2026
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: निषाद पार्टी नेता की आत्महत्या से राजनीतिक उबाल, विधायक सरवन निषाद का भारी विरोध

Santosh Kumar Yadav / Sat, Feb 22, 2025 / Post views : 75

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महराजगंज। निषाद पार्टी के नेता धर्मात्मा निषाद की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चौरी चौरा के विधायक ई. सरवन निषाद, जो इस मामले में आरोपित हैं, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद के निर्देशानुसार स्वर्गीय धर्मात्मा निषाद के पैतृक आवास नरकटहा, जनपद महराजगंज परिजनों से मिलने पहुंचे। यहाँ उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। धर्मात्मा निषाद के बड़े भाई परमात्मा निषाद और ग्रामीणों ने विधायक के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और उन्हें घर से बाहर निकाल दिया। परमात्मा निषाद ने आरोप लगाया कि उनके भाई की मौत के लिए विधायक और पार्टी के अन्य नेता जिम्मेदार हैं, जिन्होंने उनके भाई को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा कि उनके पास इस उत्पीड़न के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। घटना पर अपनी सफाई देते हुए विधायक सरवन निषाद ने कहा कि वे निर्दोष हैं और अगर जांच में दोषी पाए जाते हैं, तो वे जेल जाने के लिए तैयार हैं। उनके विरोध का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। 16 फरवरी को धर्मात्मा निषाद ने आत्महत्या करने से पहले एक फेसबुक पोस्ट लिखी थी, जिसमें उन्होंने कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि वे पिछले 10 वर्षों से डॉ. संजय कुमार निषाद के साथ जुड़े हुए थे और निषाद समाज के हित में लगातार संघर्ष कर रहे थे। लेकिन जब उनकी लोकप्रियता बढ़ी, तो उनके खिलाफ साजिशें रची गईं। धर्मात्मा निषाद ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया था कि डॉ. संजय कुमार निषाद और उनके बेटों ने योजनाबद्ध तरीके से उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाया और उनके सहयोगियों को भी उनके खिलाफ भड़काया। उन्होंने बताया कि एक लूटपाट के फर्जी केस में उन्हें फंसाया गया, जिसकी वजह से उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपने करीबी मित्र जय प्रकाश निषाद पर भी धोखा देने का आरोप लगाया। साथ ही, उन्होंने गुलशन निषाद नामक व्यक्ति की हत्या का जिक्र किया, जिसे प्रशासन ने दुर्घटना बताकर दबाने की कोशिश की थी। जब वे इस मामले में पुलिस पर दबाव बनाने पहुंचे, तो उल्टा उनके खिलाफ ही मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। धर्मात्मा निषाद की आत्महत्या के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। इस घटना ने निषाद पार्टी के भीतर की कलह को उजागर कर दिया है और पार्टी के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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