रुदौली मे सरकारी क्रय विक्रय केंद्र, संजय गांधी शीत गृह की हालत बद से बद्तर किसान हो रहे परेशान। 40 वर्ष पहले स्थापित हुआ संजय गांधी शीतगृह की हालत बद से बदतर हो गई है रुदौली में शीतगृह ना होने से किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है आलू भंडारण की व्यवस्था ना होने से किसान आलू की खेती से मुंह मोड़ रहे हैं अब यहां के किसान घरेलू उपयोग के लिए ही आलू की किसानी करते हैं तहसील क्षेत्र में एक भी सीत ग्रह नहीं है शीत ग्रह के लिए किसानों को 40 50 किलोमीटर जाना पड़ता है 80 के दशक में भेलसर के निकट सहकारी शीतगृह की स्थापना की गई थी 5 वर्ष बाद ही सरकारी उदासीनता के चलते वह बंद हो गया उसको पुनः चालू कराने के वादे बहुत हुए लेकिन एक भी धरातल पर नहीं उतर सके अब शीत ग्रह पर लोक निर्माण विभाग ने अपना मिक्स प्लांट लगा दिया है गिट्टी बालू व मोरंग के ढेर लगे हैं किसान कुलदीप मौर्य रामदीन रावत जंग जीत जितेंद्र कुमार बताते हैं कि यहां पर मंडी समिति भी है फिर भी शीतगृह ना होने से किसान अपना उत्पाद शीतगृह में नहीं रख पाते हैं एक बीघा खेत में 35 किलो आलू का बीज 20 किलो डीएपी व यूरिया सिंचाई की लागत के बाद आलू तैयार होती है जब आलू की फसल तैयार होती है तब बाजार मूल्य बहुत कम होता है इसलिए आलू को शीतगृह में किसान रखते हैं आलू के दामों में उछाल आने पर शीतगृह से आलू निकालकर बेचने पर अच्छा मुनाफा होता है वहीं एसडीएम स्वप्निल यादव ने बताया कि शीतगृह के संचालन का प्रयास करेंगे।