अयोध्या के जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में तैनात नौ कर्मचारियों सीएमएस डॉ सीबीएन त्रिपाठी ने ब्लड बैंक से हटाकर क्षेत्रीय निदान केंद्र भेज दिया है। इन कर्मचारियों की खिलाफ ब्लड बैंक की दलाली करने के आरोप थे। मामला ब्लड बैंक में एक शख्स ने तीन महीने में सात बार खून दिया। दलाल के जरिए आए इस व्यक्ति का खून अनुपयोगी था। बावजूद इसके ब्लड बैंक के कर्मचारियों ने उसका रक्त ले लिया और उसके बदले दलाल के माध्यम से मरीजों को रक्त की सप्लाई की गई। इन कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आयी है।
सीएमएस डॉ. सीबीएन त्रिपाठी को पता चला की एक ब्लड बैंक में सदर बाजार के लालकुर्ती निवासी जितेंद्र कुमार ने रुपयों की लालच में तीन माह में सात बार अपना खून दान में दिया है। मामला संज्ञान में आने के बाद सीएमएस ने तीन सदस्यीय टीम का गठन कर मामले की जांच शुरू कराई। जांच में पता चला कि जितेंद्र कुमार दलाल के जरिए खून बेचता था और उसे हर बार 1000 रुपये मिलते थे। जबकि उसका मरीज को चढ़ाने लायक नहीं था। जांच में ब्लड बैंक के नौ कर्मचारी निगरानी में लापरवाही के दोषी पाए गए।
सीएमएस ने सीनियर लैब टेक्नीशियन वीके त्रिपाठी, एलटी वीरेंद्र कुमार जायसवाल, आरके यादव, सीनियर लैब अटेंडेंट अनिल कुमार सिंह, लैब अटेंडेंट राहुल पाठक, नेतराम, घनश्याम, वीके पांडेय व परमिंदर को ब्लड बैंक से हटाकर क्षेत्रीय निदान केंद्र भेज दिया। उनके स्थान पर क्षेत्रीय निदान केंद्र के कर्मचारी यहां तैनात किया गया है। सीएमएस ने बताया कि अस्पताल में किसी भी प्रकार के लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उमाशंकर तिवारी..