काशी के उत्तरी गंगा तट पर मिली दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग

वाराणसी। काशी के उत्तरी गंगा तट पर मिली दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग!पुरातत्विक विशेषज्ञों ने इस एकमुखी शिवलिंग को 9वीं से 10वीं शताब्दी के गुर्जर प्रतिहार काल का बताया जा रहा है! दुर्लभ एकमुखी शिवलिंग बलुआ पत्थर से बनी है! मुख पर भगवान शिव की शांत मुद्रा,जटामुकुट,गोल कुंडल और सूक्ष्म नक्काशी इसे कलात्मक रूप से अत्यंत विशिष्ट बनाती है! जबकि मूर्ति का ऊपरी भाग गोलाकार लिंगाकार है,जबकि सामने स्पष्ट रूप से उकेरा गया शिव–मुख इसे बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है! एकमुखी प्रतिहार काल की उत्कृष्ट शिल्पकला का प्रमाण है! इसमें उस युग की सौम्यता और स्थानीय कारीगरों की कलाकारी साफ दिखाई देती है! गंगा किनारे ऐसे एकमुखी शिवलिंग का मिलना यह साफ दर्शाता है कि यहाँ कभी एक सक्रिय शैव मंदिर या मठ रहा होगा! बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि इस स्थल के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और संरक्षण का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि इस महत्वपूर्ण खोज का सही अभिलेखन हो सके।


